भगवान श्रीकृष्ण गीता में काम का परिणाम लोभ न बताकर सीधे क्रोध ही बताते हैं। संग से कामना उत्पन्न होती है और कामना से क्रोध जन्म लेता है। लगता है कि बीच की कड़ी टूटी हुई है। यह भी तो वे कह सकते थे कि कामना से लोभ जन्म लेता है। पर वह न कहकर कामना से क्रोध उत्पन्न होने की बात कहते हैं। कारण यह है कि व्यक्ति के मन में जब कामना पूर्ति से लोभ की वृत्ति उत्पन्न होगी, तो वह कभी संतुष्ट तो होगी नहीं और असंतोष क्रोध को ही जन्म देगा। इसलिए उन्होंने काम के पश्चात सीधे क्रोध के ही उत्पन्न होने की बात कही।
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