Friday, 26 June 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

भगवान राम लोकशिक्षा के लिए अपने जीवन में दुर्गुण को स्वीकार करते हैं। इसलिए जब वे सीताजी के साथ राक्षसों के नाश की भावी योजना बना रहे थे, उन्होंने लक्ष्मणजी को अपने पास से हटा दिया था, क्योंकि उन्हें मालूम था कि लक्ष्मण इसे बिल्कुल पसन्द नहीं करेंगे , वे तो कहेंगे कि महाराज! इसके लिए इतनी बड़ी योजना की क्या आवश्यकता है ? मैं ही सब राक्षसों को मार देता हूँ और लक्ष्मणजी ऐसा करने में समर्थ हैं। उनके बारे में भगवान राम ने कहा ही है - जगत में जितने भी राक्षस हैं, लक्ष्मणजी क्षणभर में उन सबको मार सकते हैं। मन में फिर प्रश्न होता है कि जब ऐसी बात थी, तो भगवान केवल लक्ष्मणजी को लेकर ही लंका पर आक्रमण कर सकते थे। तब उन्होंने बानरों की सेना एकत्रित क्यों की ? इसका भी एक तात्पर्य है। ये वानर कौन हैं ? गोस्वामीजी विनयपत्रिका में लिखते हैं - ये सब भालू-वानर मोक्ष के साधन हैं। तात्पर्य यह है कि ईश्वर सर्वसमर्थ होते हुए भी साधनों का आश्रय लेकर लंका पर विजय प्राप्त करता है। इसके माध्यम से वह दिखाना चाहता है कि कहीं भगवत्कृपा का आश्रय लेकर साधक के जीवन में निष्क्रियता न आ जाए। इसलिए समाज के सम्मुख साधना का पक्ष रखने के लिए वे जीवन में त्रुटियों को स्वीकार करते हैं।

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