Tuesday, 23 June 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्...............

यह समझना भूल होगी कि एक बार काम पर विजय प्राप्त कर लेने से, कोई भय नहीं रह जाता है। शू्र्पणखा अकेली नहीं है। वह निराश होकर चुप नहीं बैठती। उसके पास अगणित साधन हैं, जिनके माध्यम से वह बदला लेने की चेष्टा करती है। वह जाती है खर, दूषण और त्रिशिरा के पास और उनके चौदह हजार सैनिकों को राम के विरुद्ध प्रेरित करती है। भगवान राम चौदह सैनिकों सहित तीनों का नाश कर देते हैं। अर्थात उन्होंने समस्त दुर्गुणों का नाश कर दिया, पर यहाँ भी एक क्रम है। जब चौदह हजार राक्षसों की सेना लेकर तीनों आये, तो भगवान राम ने लक्ष्मण से कहा - लक्ष्मण ! राक्षसों की भयानक सेना आ गयी है। जानकीजी को लेकर तुम पर्वत की कन्दरा में चले जाओ। सावधान रहकर सीताजी की रक्षा करना। यहाँ पर सीताजी की रक्षा का अभिप्राय क्या है? यह कि यदि जीवन में वैराग्य है तो भक्ति सुरक्षित है। भक्ति का पक्ष विश्वास का है और विश्वास के बिना वैराग्य नहीं टिकता। तात्पर्य यह है कि जब भक्ति वैराग्य के द्वारा सुरक्षित होती है तब सारे दुर्गुण-दुर्विचार पराजित हो जाते हैं।

No comments:

Post a Comment