Wednesday, 15 July 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

जब अयोध्या में महाराज दशरथ अस्वस्थ हो गये, कैकेयी अस्वस्थ हो गयीं, मंथरा और सारा समाज अस्वस्थ हो गया, तो भगवान राम और सीताजी वन को चले जाते हैं। भगवान राम हैं साक्षात ईश्वर और सीताजी हैं मूर्तिमती शांति। तात्पर्य यह है कि जब व्यक्ति और समाज मानस-रोग से ग्रस्त होता है, ईश्वर और शांति दोनों उसके जीवन से दूर चले जाते हैं।

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