यह रामचरितमानस क्या है ? चिकित्सा के संदर्भ में यदि हम देखें, तो इसमें विचित्र रोगियों का वर्णन किया गया है। उन रोगियों में कुछ ऐसे हैं, जो स्वथ्य हो जाते हैं और कुछ ऐसे भी हैं, जो स्वथ्य नहीं हो पाते। इन रोगियों के दृष्टान्तों के माध्यम से मानो यह बताया गया है कि किस प्रकार के व्यक्ति स्वस्थ होते हैं और किस प्रकार के रोगियों की अस्वस्थता दूर नहीं होती। जैसे सती हैं। उनके चरित्र में एक रोग उत्पन्न होता है और वह इस सीमा तक पहुँच जाता है कि उन्हें शरीर का परित्याग करना पड़ता है। पीलिया एक रोग है, जिसमें नेत्रों में पीलापन आ जाता है। जब यह रोग बहुत बढ़ जाता है, तब व्यक्ति को सारी वस्तुएँ पीली दिखाई देने लगती हैं। वस्तु तो ज्यों की त्यों होती है, पर आँखों का रंग बदल जाने से वस्तु भी बदली हुई दिखाई देती है। तो, सती के जीवन में ऐसे ही मानसिक पीलिया का जन्म होता है। वे वन में भगवान राम को सीता के वियोग में विलाप करते हुए देखती हैं और जब भगवान शंकर उन्हें ईश्वर और सच्चिदानन्द कहकर दूर से प्रणाम करते हैं, तो वे चकित हो जाती हैं, क्योंकि श्रीराम उन्हें अत्यंत साधारण व्यक्ति दिखाई पड़ते हैं। भगवान शंकर चाहते हैं कि सती का यह रोग किसी प्रकार दूर हो, पर उनके जैसे कुशल चिकित्सक के होने पर भी सती का रोग इस जन्म में दूर नहीं होता।
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