Saturday, 18 July 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्.............

मनुष्य के मन में रहने वाला जो काम है, वही मानो वात है। आयुर्वेदशास्त्र में वात की चिकित्सा को सबसे कठिन बताया गया है। या यों कह सकते हैं कि यद्यपि सभी मनोविकार बड़े जटिल हैं, फिर भी काम की जटिलता सबसे अधिक है। इसलिए रामचरितमानस में काम की समस्याओं के निदान का वर्णन काम-रोग के सर्वश्रेष्ठ वैद्य भगवान शंकर के चरित्र के माध्यम से किया गया है। काम की जो विकृतियाँ सामान्य मनुष्य और साधक के जीवन में दिखाई देती है, उनकी चिकित्सा का संकेत भगवान शंकर के चरित्र में प्राप्त होता है। वैसे तो भगवान शंकर समस्त मानस-रोगों के महान वैद्य हैं, पर उनकी सबसे बड़ी विशेषता इस काम-रोग को विनष्ट करने में है और इसलिए उनके अनेक नामों में एक नाम कामारि भी है।

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