श्रीराम बालि का वध करके सुग्रीव को सिंहासन पर बैठाते हुए कहते हैं - तुम अपना राज्य अंगद के साथ चलाओ। इसके माध्यम से भगवान राम व्यवहार का, काम-काज का मूलमंत्र देते हैं। कैसे? भगवान राम ने कहा कि तुम किष्किन्धा का राज्य चलाओ, पर अकेले नहीं, अंगद के साथ चलाओ। भगवान राम का यह वाक्य केवल सुग्रीव के लिए नहीं वरन उन समस्त लोगों के लिए महत्व का है, जिन्हें समाज और संसार में व्यवहार करना है। अंगद के साथ राज्य चलाना चाहिए, इसका तात्पर्य क्या है? वस्तुतः श्रीराम सुग्रीव और अंगद के मन की दूरी से परिचित हैं। उन्होंने किष्किन्धा का राजा तो सुग्रीव को बनाया, पर उत्तराधिकार बालि के पुत्र अंगद को दिया। इसका अभिप्राय यह है कि परिवार अथवा समाज में जो आपसी टकराहट होती है, वह अपने और पराये के भेद को लेकर होती है। यदि भेद बुद्धि न हो तो न तो परिवार में टकराहट होगी और न समाज में।
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