Saturday, 10 February 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

लक्ष्मणजी भगवान राम की सेवा किस तरह कर रहे हैं ? गोस्वामीजी कहते हैं कि हम लोगों से अधिक सेवा नहीं कर रहे हैं । कैसे ? जैसे अज्ञानी व्यक्ति शरीर की पूजा करता है, वैसे ही लक्ष्मणजी श्रीराम की सेवा कर रहे हैं । लंका का हर व्यक्ति रात-दिन देह की ही पूजा में लगा है । हनुमानजी ने सारी लंका को जला क्यों दिया ? गोस्वामीजी ने जीवन के सत्य को प्रकट कर दिया कि देह-देवता की आप चाहे जीवन भर पूजा कीजिए, पर अन्त में उसको जलाना ही पड़ेगा । जलाने को छोड़कर उस देवता की अन्तिम परिणति और कुछ नहीं है । हनुमानजी लंका को जलाकर जीवन के उस सत्य को उद्घाटित कर देते हैं । इसका अभिप्राय यह है कि या तो देवता राम हैं या शरीर । गोस्वामीजी कहते हैं, या तो ममता का त्याग करो या ममता श्रीराम से करो ।

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