अंगद का हाथ पकड़कर बालि ने श्रीराम से कहा था कि आप अंगद का हाथ पकड़ लीजिए । यहाँ पर हमें अन्तिम क्षणों में बालि की चतुराई का परिचय मिलता है और यह चतुराई पूरे जीवनभर अंगद को उत्तराधिकार के रूप में मिली रही । अंगद को बुलाकर बालि यह भी कह सकता था कि प्रभु के चरणों को कसकर पकड़ लो, पर यह बिल्कुल नहीं कहा, बल्कि भगवान से कहा कि महाराज, आप इसका हाथ पकड़ लीजिए । अंगद से क्यों नहीं कहा कि चरण पकड़ लो ? बालि का तात्पर्य यह था, महाराज ! यदि जीव पकड़ेगा तो छोड़ भी सकता है, पर आप पकड़ेंगे तो छूटने का डर नहीं है । इसलिए हम अंगद से क्यों कहें कि वह आपको पकड़े, हम तो आपसे कहेंगे कि आप अंगद को पकड़ लीजिए ।
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