प्रभु का बड़ा कौतुक है कि वे जिससे मिलते हैं, उससे उसी की भाषा में, वैसे ही बनकर बातें करने लगते हैं । हनुमानजी से प्रभु ने नाता जोड़ लिया । प्रभु ने उनसे कहा कि भाई ! हम दोनों का नाता तो शाश्वत है । तुमने स्वीकार किया ही है कि मैं ब्रह्म हूँ और संसार जानता है कि तुम ब्रह्मचारी हो, तो ब्रह्म और ब्रह्मचारी का संबंध तो शाश्वत है । भगवान राघवेन्द्र जब हनुमानजी से नाता जोड़ते हैं, तो ब्रह्म और ब्रह्मचारी का नाता जोड़ते हैं, पर सुग्रीव तो ब्रह्मचारी नहीं, उनसे प्रभु ब्रह्म-तत्व की बात नहीं कहते । उनसे भगवान बिल्कुल व्यावहारिक बातें कहते हैं ।
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