ईश्वर में अनन्त गुण हैं और महाप्रभु वल्लभाचार्य कहते हैं कि ईश्वर 'अखिल विरुद्ध धर्माश्रय' हैं । एक ही व्यक्ति में परस्पर विरोधी गुण दिखाई नहीं देते, परन्तु ईश्वर में समस्त विरोधी गुण एक साथ दिखाई देते हैं । प्रश्न उठता है कि ईश्वर भयदायक हैं या अभयदायक ? इसका वही उत्तर है । ईश्वर में कृपागुण भी है और न्यायगुण भी । कृपा और न्याय परस्पर एक-दूसरे से भिन्न हैं । जो न्याय करेगा, वह कृपा नहीं करेगा और जो कृपा करेगा, वह न्याय नहीं कर सकेगा, पर ईश्वर बहुत बड़ा न्यायाधीश है और ईश्वर परम कृपालु भी है । इसका सीधा-सा अर्थ यह है कि जिसके जीवन में कृपागुण की स्मृति होती है, वह अभय हो जाता है और जिसके जीवन में ईश्वर के न्यायगुण की याद आती है, वह डर के मारे काँपने लगता है ।
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