कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं कि व्यावहारिक जीवन के प्रति उन्हें कोई आकर्षण नहीं होता अर्थात ऐसे व्यक्ति के जीवन में पूर्व-पूर्व जन्मों से वैराग्य या उपरामता का उदय हो गया है । जिनके जीवन में यह वैराग्य व उपरामता की वृत्ति आ गयी है, उनके लिए यह जरूरी नहीं कि जीवन में व्यवहार को स्वीकार करें, पर ऐसे व्यक्ति बहुत विरले होते हैं । अधिकांश लोग ऐसे होते हैं, जिनके संस्कार सांसारिक होते हैं । यहाँ पर यदि तुलना के रूप में देखें तो स्पष्ट रूप से तीन पात्र सामने आते हैं - श्री हनुमानजी, सुग्रीव और अंगद ।
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