Friday, 23 February 2018

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ....

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....
हनुमानजी से भगवान श्रीराम ने कभी किसी व्यावहारिक कार्य के लिए अपेक्षा नहीं रखी । रामराज्य के बाद भगवान ने अयोध्या से सारे बन्दरों को तो विदा किया, पर हनुमानजी को नहीं किया । इसका एक व्यावहारिक पक्ष यह भी है और वह यह कि भगवान श्रीराघवेन्द्र यह मानकर चलते हैं कि अन्य बन्दरों के लिए पारिवारिक जीवन आवश्यक है, पर हनुमानजी व्यावहारिक भूमिकाओं से ऊपर उठ चुके हैं । उनके जीवन में व्यवहार की अपेक्षा नहीं है । इसलिए भगवान राम ने किसी एक वाक्य के द्वारा भी हनुमान को वहाँ से विदा करने का प्रयास नहीं किया ।

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