युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....
सुग्रीव के जीवन में संकेत आता है कि हनुमानजी के द्वारा सुग्रीव धीरे-धीरे भगवान की दिशा में मोड़े जाते हैं । हनुमानजी के जीवन में यह उदारता का पक्ष है और यह बड़ा व्यावहारिक भी है । इसका अर्थ है कि जैसे आपके परिवार में आपके कई पुत्र हों, कई सदस्य हों, तो क्या आप परिवार के हर सदस्य से एक ही प्रकार की आशा रखते हैं ? एक नन्हा बालक है, जो दो-चार साल का है और एक युवक है, दोनों पुत्र हैं । ऐसी स्थिति में हम एक युवक पुत्र से जो आशा रखते हैं, वह एक नन्हें बालक से नहीं रख सकते । हम यह मानकर चलते हैं कि युवक का कर्तव्य यही है, पर नन्हे बालक को तो कुछ-न-कुछ छूट देनी ही पड़ेगी । ऐसी स्थिति में श्री हनुमानजी के चरित्र में उदारता का पक्ष यही है कि वे स्वयं सुग्रीव की कमियों से परिचित होते हुए भी यह जानते हैं कि सुग्रीव जैसे दुर्बल व्यक्ति को आश्रय की जरूरत है, तिरस्कार की नहीं । यदि उनको घृणा की दृष्टि से देखकर दूर भगा दिया जाय, तब तो ऐसे व्यक्ति के कल्याण का कोई मार्ग रह ही नहीं जायेगा ।
Monday, 19 February 2018
युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....
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