युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .....
न तो भगवान श्रीराम की राज्य जाने की कोई समस्या थी और न ही तात्विक दृष्टि से सीताजी से उनका वियोग ही हुआ है । परन्तु यदि इसे उस दृष्टि से न देखकर रंगमंच की दृष्टि से देखें तो वियोग हुआ है, पर राघवेन्द्र तो सर्वशक्तिमान ईश्वर हैं, सीताजी को पाने के लिए उन्हें सुग्रीव के सहयोग की कोई आवश्यकता नहीं है, पर भगवान यह कहते हैं कि मित्र ! हम दोनों एक-दूसरे की सहायता कर सकते हैं । जीव भी ईश्वर की सहायता कर सकता है और ईश्वर भी जीव की, इसकी भूमिका ईश्वर ने प्रस्तुत की ।
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