भगवान राम को श्रीसीताजी कैसे मिलीं ? नवधाभक्ति में पहला सूत्र है -
'प्रथम भगति संतन्ह कर संगा।'
और जब लक्ष्मणजी ने अरण्यकाण्ड में भगवान राम से पूछा कि महाराज ! आपकी भक्ति कैसे मिलती है ? तो भगवान राम ने भक्ति का सूत्र देते हुए कहा -
भगति तात अनुपम सुखमूला।
मिलइ जो संत होइँ अनुकूला।।
भक्ति समस्त सुखों का केंद्र है, किन्तु बिना संतकृपा के भक्ति प्राप्त नहीं होती । भगवान राम को श्रीसीताजी कहाँ मिलीं ? पुष्पवाटिका में । यही संतकृपा का सूत्र है । अगर महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को फूल चुनने पुष्पवाटिका में न भेजते, तो उन्हें श्रीसीताजी का साक्षात्कार नहीं होता । इसलिए संत ही भक्ति की प्राप्ति में मूल प्रेरक हैं । भगवान श्रीराम अपनी लीला के माध्यम से हमें यह बता देना चाहते हैं कि संत के बताए मार्ग से चलकर ही भक्ति की प्राप्ति होती है ।
'प्रथम भगति संतन्ह कर संगा।'
और जब लक्ष्मणजी ने अरण्यकाण्ड में भगवान राम से पूछा कि महाराज ! आपकी भक्ति कैसे मिलती है ? तो भगवान राम ने भक्ति का सूत्र देते हुए कहा -
भगति तात अनुपम सुखमूला।
मिलइ जो संत होइँ अनुकूला।।
भक्ति समस्त सुखों का केंद्र है, किन्तु बिना संतकृपा के भक्ति प्राप्त नहीं होती । भगवान राम को श्रीसीताजी कहाँ मिलीं ? पुष्पवाटिका में । यही संतकृपा का सूत्र है । अगर महर्षि विश्वामित्र श्रीराम को फूल चुनने पुष्पवाटिका में न भेजते, तो उन्हें श्रीसीताजी का साक्षात्कार नहीं होता । इसलिए संत ही भक्ति की प्राप्ति में मूल प्रेरक हैं । भगवान श्रीराम अपनी लीला के माध्यम से हमें यह बता देना चाहते हैं कि संत के बताए मार्ग से चलकर ही भक्ति की प्राप्ति होती है ।