Sunday, 21 February 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ..........

विनयपत्रिका मानस-रोगों की चिकित्सा का परिपूर्ण विज्ञान है । उसमें एक ओर तो जहाँ रोगों के लक्षण, उनका सूक्ष्म विश्लेषण तथा निदान प्रस्तुत किया गया है, वहीं उनकी सटीक चिकित्सा तथा अचूक औषध का निर्देश भी है, किन्तु उसे समग्र रूप से न पढ़कर यदि केवल रोग के लक्षण को पढ़ ले और वे लक्षण स्वयं उसके जीवन में दिखाई दे जाय, तो हो सकता है कि इससे उनके अन्तःकरण में भय, आतंक तथा निराशा का उदय हो, किन्तु विनयपत्रिका के उन पदों को यदि हम आदि से अंत तक पढ़ें, तो देखेंगे कि दैन्य से प्रारंभ होने पर भी पदों की समाप्ति नैराश्य में नहीं, बल्कि एक ऐसी परिपूर्णता, एक ऐसी आस्था तथा विश्वास में होती है, जहाँ सारे रोगों का समूल नाश होता है तथा पूर्ण स्वस्थता का लाभ होता है । गोस्वामीजी की विनयपत्रिका पठनीय है । यह साधकों के लिए एक श्रेष्ठ ग्रंथ है । इसमें गोस्वामीजी की एक विशिष्ट शैली है ।

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