रामचरितमानस में ज्ञान और भक्ति दोनों के ही सूत्र हैं । पुष्पवाटिका में सीताजी को श्रीराम की प्राप्ति होती है और श्रीरामचन्द्र को श्रीसीता की । आध्यात्मिक दृष्टि से इसका क्या तात्पर्य है ? भगवान राम साक्षात अखण्ड ज्ञानघन हैं और श्रीसीताजी हैं मूर्तिमती भक्ति । श्रीसीताजी ने भगवान राम को पाया, मानो श्रीसीताजी ने अपने चरित्र के माध्यम से ज्ञान को प्राप्त करने की पद्धति बतायी और भगवान राम ने श्रीसीताजी को पाया, मानो उन्होंने हम संसार के जीवों के सामने वह उपाय या साधना-पद्धति प्रस्तुत की, जिससे भक्ति प्राप्त होती है ।
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