Thursday, 11 February 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ...........

लक्ष्मणजी ने प्रभु से पूछा कि सुग्रीव की आत्मकथा सुनकर आपको कैसा लगा ? तो उन्होंने कहा कि लक्ष्मण ! सुग्रीव में तो नवधाभक्ति का नवाँ लक्षण पूरी तरह से विद्यमान है । नवाँ लक्षण क्या है ?- "नवम सरल सब सन छलहीना"- नवीं भक्ति है सरलता । प्रभु ने कहा कि लक्ष्मण ! क्या तुमने इस बात पर गौर किया कि सारी कथा सुग्रीव ने स्वयं सुनायी है । सुग्रीव के संबंध में ये बातें अगर कोई दूसरा सुनाता, तो सुनकर आश्चर्य नहीं होता, परन्तु स्वयं सुनाते समय सुग्रीव यदि चाहते तो अपने चरित्र को इस पद्धति से भी रख सकते थे कि जिससे उनकी अपनी दुर्बलताएॅ प्रकट न हो पातीं, लेकिन बड़ी सरलता से उन्होंने अपनी दुर्बलताओं को स्वीकार किया । यह बड़ी महत्वपूर्ण बात है । भक्तिशास्त्र में इसे अत्यधिक महत्व दिया गया है ।

No comments:

Post a Comment