लक्ष्मणजी के समान प्रबुद्ध कौन हो सकता है - जब समस्त भोग-विलासों से वैराग्य हो जाय तभी जानना चाहिए कि जीव जाग गया है । लक्ष्मणजी तो नित्य जाग्रत, सदा प्रबुद्ध वैराग्य के प्रतीक हैं । पर आज एक क्षण के लिए जैसे उन्हें झपकी-सी आ गयी थी । जब मेघनाद आक्रमण करने आया, तो बन्दरों ने लक्ष्मणजी को पुकारा और तब लक्ष्मणजी धनुष-बाण हाथ में लेकर क्रुद्ध हो चल पड़े । महान प्रबुद्ध साधक, जो काम का विजेता है, वैराग्यवान है, वह काम से लड़ने चल पड़ा । लेकिन क्षण भर के लिए जैसे ईश्वर विस्मृत हो गया, ईश्वर से जैसे एकत्व होना चाहिए, वह एक क्षण के लिए छूट गया । और तब वैराग्य मूर्छित हो गया । मेघनाद के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए । पर हनुमानजी ने तुरन्त उन्हें उठा लिया और प्रभु की गोद में सुला दिया । इसका अभिप्राय क्या है ? गोस्वामीजी हनुमानजी के लिए वैराग्य के साथ एक शब्द और जोड़ देते हैं - हनुमानजी प्रबल वैराग्य हैं । भगवान राम की दृष्टि हनुमानजी की ओर गई । वैराग्य मूर्छित हो गया तो उसे चैतन्य करने का कार्य प्रबल वैराग्य को सौंपा गया ! भगवान का संकेत यह था कि काम के प्रहार से लक्ष्मण मूर्छित हैं तो उसकी दवा प्रबल वैराग्य हनुमानजी ले आवें ।
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