भगवान श्रीराघवेन्द्र जब जनकजी की वाटिका में जाते हैं तब गोस्वामीजी कहते हैं कि पक्षियों ने भगवान राम का स्वागत किया । और वे सब पक्षी अलग-अलग जाति के थे - चातक, कोकिल, कीर, चकोर और मोर सबने प्रभु का स्वागत किया । लेकिन गोस्वामीजी ने सबका इस रूप में सामंजस्य किया कि चातक, कोकिल, कीर, चकोर, मोर आदि जो पक्षी हैं, वे तो ऊँचे पक्षी माने जाते हैं । गोस्वामीजी से मानो यह प्रश्न किया गया कि महाराज ! भले ही श्रीराम का स्वागत करने के लिए पक्षी आये हों, लेकिन जितने भी पक्षी थे वे सभी अच्छे पक्षी ही तो थे, परन्तु संसार में तो बुरे पक्षी भी होते हैं और तब गोस्वामीजी ने जो अत्यंत निम्न माने जाने वाले सबसे निंदनीय पक्षी गीध तथा कौआ हैं, इन दोनों को भी राम और रामकथा से जोड़ दिया । गीध का रामकथा से जुड़ जाना, इसको यदि सांकेतिक भाषा में कहें तो यों कह सकते हैं कि गीध के पक्ष का सदुपयोग हो गया ।
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