अनेक महापुरूष तथा अनेक ग्रन्थ हैं और सभी किसी न किसी दृष्टि से बड़े विलक्षण हैं । पर अगर रामकथा और रामचरितमानस की दृष्टि से विचार करके देखें तो उनमें एक बड़ा अनोखा सामंजस्य दिखायी देगा । जितने पक्ष हैं, चाहे ज्ञान और भक्ति का पक्ष हो, चाहे कर्म और ज्ञान का पक्ष हो, चाहे पुरुषार्थ और प्रारब्ध का पक्ष हो अथवा नीति और प्रीति का पक्ष हो और चाहे स्वार्थ तथा परमार्थ का पक्ष हो, परन्तु विचार करके देखें तो पूरे रामायण में इन सबका सामंजस्य आपको मिलेगा । गोस्वामीजी कहते हैं - आप पक्षी (पक्षपाती) हैं तो लड़िए मत, आइए रामकथा में बैठ जाइए और फिर देखिए, गोस्वामीजी ने सारे पक्षों का सामंजस्य कितना सुन्दर किया ।
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