Tuesday, 22 November 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

यह जो श्रीराम की कथा है, इसे कौए ने कहा और हंसों ने सुना, पर गरुड़ जी भी बाद में जब पहुँच गये तो काकभुशुण्डिजी ने गरुड़ जी से बहुत बढ़िया बात कही । उन्होंने पूछा कि आप मेरे पास क्यों आये ? बोले - महाराज ! यह तो मैंने पहले ही बता दिया कि सन्देह के कारण आया । काकभुशुण्डिजी ने कहा - बिल्कुल नहीं आप भगवान को निरन्तर धारण करने वाले हैं, क्या आपको भ्रम हो सकता है ? आप आये नहीं हैं, आपको भगवान ने भेजा है । नहीं महाराज ! मुझसे तो प्रभु ने नहीं कहा । बोले - मैं जानता हूँ । आपके ह्रदय में भगवान थे, उन्होंने भेजा है । क्यों भेजा ? बोले - प्रभु को लगा होगा कि हंस तो रामकथा सुनने लगे पर पक्षियों के राजा तो गरुड़ हैं, जब तक वह कौए से न सुनें तब तक पूरी तरह से भक्ति की महिमा परतिष्ठापित नहीं होगी । इसलिए मोह के बहाने भगवान ने आपको भेजकर वस्तुतः भक्ति का बड़प्पन संसार के सामने सिद्ध किया ।

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