कभी-कभी भावराज्य की सत्यता और मिथ्यात्व की बात उठती है । भक्तों को भावराज्य में जो अनेक अनुभूतियाँ होती हैं, उसे लोग मन की कल्पना कहते हैं । उनकी मान्यता है कि जो वस्तु सबको दिखाई नहीं देती वह वास्तविक नहीं हो सकती । शरीर सत्य है, भाव कल्पित हैं । पर भक्तिशास्त्र की मान्यता है कि शरीर की तो एक सीमा है और उसकी दृष्टि-सामर्थ्य भी सीमित है, पर भाव असीम है और असीम के राज्य में तो भाव ही सत्य है । इसलिए भगवान राम ने कैकेयीजी को उसी जन्म में माँ कहकर पुकारा और अन्ततः कैकेयीजी को स्वीकार करना ही पड़ा कि हाँ, अब मेरा भ्रम दूर हो गया ।
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