Friday, 28 October 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ........

श्रीभरत अयोध्या के समस्त नर-नारियों को लेकर चित्रकूट क्यों जाते हैं ? यही चिकित्सा है । श्रीभरत कहते हैं, पहले चित्रकूट चलिए । अयोध्या के समस्त नर-नारियों को, सभी सम्प्रदाय के लोगों को निमन्त्रण देते हैं । भरतजी सब लोगों को लेकर चित्रकूट जाते हैं तो कुछ लोगों को वे हाथी पर बिठा देते हैं, कुछ लोगों को घोड़े पर, कुछ को रथ पर, कुछ को पालकी पर और कुछ  लोग पैदल ही चलते हैं । संक्षेप में इसका अभिप्राय यह है कि हर व्यक्ति एक समान योग्यता और संस्कार का नहीं होता । चलना तो सबको ईश्वर की ओर है । पहुँचना तो सबको चित्रकूट है । जब तक चित्रकूट नहीं पहुँचेंगे, तब तक रोग दूर नहीं होगा । चित्त के संस्कार से ही रोग उद्भूत होता है । चित्रकूट जाने का अर्थ यह है कि अहंकार का त्याग करके मन और बुद्धि को साथ लिये चित्त के राज्य में प्रवेश करें और भगवान का साक्षात्कार करें ।

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