Thursday, 13 October 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .........

भगवान राम ने कैकेयीजी से कहा - माँ, आज सिद्ध हो गया कि तुम मेरी जननी हो । क्यों ? भगवान राम का तात्पर्य यह है कि बालक जब बोलने लगता है, तब तो उसकी भाषा को प्रत्येक व्यक्ति समझ लेता है कि बालक क्या कह रहा है । पर बालक जब बिल्कुल नहीं बोल पाता तब उसकी इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति कौन करता है ? उस न बोलने वाले बालक की भाषा को तो उसे गर्भ में धारण करने वाली माँ ही समझती है । माँ उसकी प्रत्येक भाषा को समझ लेती है । भगवान राम ने कैकेयीजी से कहा - माँ ! तुम मेरी जननी हो, इसका स्पष्ट प्रमाण आज मुझे मिल गया । क्या ? मेरे मन में एक विचार आया, पर डर के मारे मैं बोल नहीं पा रहा था और पूरी अयोध्या में कोई नहीं समझ पाया । केवल तुमने समझा । तुम मेरी जननी न होती तो मेरे मन की बात कैसे जान लेतीं ? भगवान राम का संकेत यह है कि कल ही जब गुरुजी ने कहा कि तुम्हें अयोध्या का राज्य मिलेगा तो मैं दुखी हो गया और सोचने लगा कि इस निर्मल वंश में यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयों को छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़े का होता है । राज्य तो छोटे को ही मिलना चाहिए, पर मैं गुरुजी के डर से नहीं कह पाया । मेरे राज्याभिषेक का समाचार सुनकर कौशल्या अम्बा प्रसन्न हो गयीं । अगर ये मेरी जननी होतीं तो मेरे मन की बात अवश्य समझ लेतीं, पर नहीं समझ पाईं । तुम समझ गयीं, सचमुच तुम्हीं मेरी जननी हो । मैं तो सोच ही रहा था कि भरत राजा होता तो कितना अच्छा होता । और आज तुमने वरदान माँग लिया कि भरत राजा हो । तुमने मेरे ह्रदय की भाषा को समझ लिया । माँ ! विश्वास करो, तुम मेरी माँ ही नहीं, मेरी जननी भी हो । मैं तुम्हारा बेटा हूँ । कैकेयी ने तो भगवान की बातों पर विश्वास नहीं किया, पर श्रीभरत ने इसे सिद्ध करके दिखा दिया कि सचमुच उनके पुत्र तो श्रीराम ही हैं ।

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