चित्रकूट का लक्षण क्या है ? जब श्रीभरत सारे समाज को लेकर चित्रकूट पहुँचे, तब सारे लोग अन्तः और बाह्य रोगों से ग्रस्त हैं । वे सब चित्रकूट पहुँचकर क्या देखते हैं ? गोस्वामीजी कहते हैं - अन्न के अभाव में भयभीत और दुखी, त्रिविध तापों से त्रस्त, क्रूर ग्रहों तथा महामारी से पीड़ित प्रजा जैसे किसी उत्तम देश और उत्तम राज्य में जाकर सुखी हो जाती है, श्रीभरत चित्रकूट पहुँचकर वैसे ही प्रसन्न हो जाते हैं । और वहाँ श्रीराम के निवास से वन की सम्पदा ऐसी सुशोभित हो रही है, जैसे अच्छे राजा को पाकर प्रजा सुखी हो जाती है । सुहावना वन ही पवित्र देश है, विवेक उसका राजा और वैराग्य मन्त्री है । ये ही चित्रकूट के लक्षण हैं । सद्गुण जहाँ सैनिक हैं और सुमति तथा शान्ति जहाँ की रानियाँ हैं । और यह चित्रकूट का राज्य बना कब ? सद्गुण के सिपाही जीवन में कब आए ? - मोहरुपी राजा को सेना सहित जीतकर विवेकरुपी राजा निष्कण्टक राज्य कर रहा है । उसके नगर में सुख, सम्पत्ति और सुकाल है । जहाँ पर मोह की पराजय हो चुकी है । श्रीभरत ने अयोध्या के लोगों को दिखा दिया कि जब तक सारा समाज मोह से ग्रस्त रहेगा तब तक वह जो सेवा करेगा, उस सेवा में कुसेवा मिली ही रहेगी । श्रीभरत का अभिप्राय यह है कि इस मोह के विनाश हेतु हमें ईश्वर के सम्मुख होना आवश्यक है ।
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