ममता के सन्दर्भ में अगर आप मानस के सारे चरित्रों पर, समस्त पात्रों पर विचार करें और मानस ही क्यों, महाभारत के पात्रों को भी लें, तो उन्हें हम और आप अपने वर्तमान जीवन के निकट पाएँगे और हमें स्पष्ट दिखाई देगा कि जब हमारे अन्तर्मन में ममता का उदय होता है, तब हम ऐसे गलत ढंग से पक्षपात करने लगते हैं कि हमारी सारी विचारशीलता, सारी गुणज्ञता व्यर्थ हो जाती है और इस ममता तथा इसके द्वारा जनित पक्षपात के कारण हम श्रेष्ठ व्यक्ति के प्रति आदरदृष्टि नहीं रख पाते । ममता की इस भयंकरता को अगर हम और अधिक स्पष्ट रूप से देखना चाहें तो रामायण और महाभारत के दो ऐसे पात्र हैं जो बड़े यशस्वी थे, परन्तु ममता के कारण उनका यश नष्ट हो गया । रामायण में कैकेयीजी और महाभारत में गान्धारी के चरित्र को लें ।
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