हम लोग व्यवहार में नित्य यह देखते हैं कि दिन भर हम लोग संसार में कभी यहाँ तो कभी वहाँ, चक्कर ही तो काटते रहते हैं । परन्तु यहाँ, वहाँ चले जाने के बाद भी व्यक्ति का अपना एक निजी घर होता है जहाँ चारों ओर से चक्कर काटने के पश्चात लौटकर व्यक्ति अवस्थित होता है । इसी तरह से हमारे और आपके जीवन में चारों ओर भटकाव होने पर भी यदि कोई न कोई ऐसा केन्द्र हो, ऐसा महापुरुष हो कि जिस पर हमारा विश्वास हो और अगर उसी केन्द्र को हम ठीक-ठीक समझकर उस महापुरुष के द्वारा ही यदि हम अपने जीवनपथ का निर्धारण करें तो हमारे जीवन में आने वाली समस्याओं का निराकरण हो जायेगा ।
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