Thursday, 16 February 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ........

हम लोग व्यवहार में नित्य यह देखते हैं कि दिन भर हम लोग संसार में कभी यहाँ तो कभी वहाँ, चक्कर ही तो काटते रहते हैं । परन्तु यहाँ, वहाँ चले जाने के बाद भी व्यक्ति का अपना एक निजी घर होता है जहाँ चारों ओर से चक्कर काटने के पश्चात लौटकर व्यक्ति अवस्थित होता है । इसी तरह से हमारे और आपके जीवन में चारों ओर भटकाव होने पर भी यदि कोई न कोई ऐसा केन्द्र हो, ऐसा महापुरुष हो कि जिस पर हमारा विश्वास हो और अगर उसी केन्द्र को हम ठीक-ठीक समझकर उस महापुरुष के द्वारा ही यदि हम अपने जीवनपथ का निर्धारण करें तो हमारे जीवन में आने वाली समस्याओं का निराकरण हो जायेगा ।

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