Sunday, 19 February 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

आजकल यद्यपि जातिवाद की आलोचना तो खूब है पर लोगों में जातिवाद भी बहुत है । इसलिए आजकल वह चौपाई तो बड़ी प्रसिद्ध और चर्चित है जो गोस्वामीजी ने भगवान राम तथा कबन्ध के मिलन के सन्दर्भ में लिखी है । इस सम्बंध में मैं आपको यह बताना चाहूँगा कि कबन्ध को भगवान राम ने जो उपदेश दिया, जो व्यक्ति केवल वही पढ़ेगा वह उलझ जायेगा । पर अगर व्यक्ति इस बात पर भी ध्यान देगा कि जिन भगवान राम ने कबन्ध को उपदेश दिया उन्हीं भगवान राम ने शबरी को भी उपदेश दिया । और दोनों को दिये गये उपदेश को सामने रखकर जब आप विचार करेंगे तो समझ लेंगे कि दोनों उपदेशों में भिन्नता के पीछे भगवान राम का उद्देश्य क्या है ? भगवान श्रीराम जानते हैं कि सबकी स्थिति अलग-अलग होती है । कबन्ध की स्थिति क्या है तथा शबरी की स्थिति क्या है, इसे भगवान श्रीराघवेन्द्र भलीभाँति जानते हैं, इसलिए दोनों सन्दर्भों में प्रभु का उपदेश इतना बदला हुआ है ।

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