ब्राह्मण की पूज्यता की बात भगवान राम ने कबन्ध के अन्दर की जो द्वेष बुद्धि है, उसको मिटाने के लिए कहते हैं । प्रथम दृष्टि में पढ़ कर लगता है कि भगवान राम ब्राह्मणों के प्रबल समर्थक हैं और शायद शूद्रों के विरोधी हैं, पर इस उपदेश के तुरंत बाद भगवान राम ने जो व्यवहार किया उसने सिद्ध कर दिया कि नहीं, नहीं - बात तो इससे उल्टी है । क्योंकि कबन्ध को गति देने के बाद सबसे पहले भगवान किसके पास गये ? - भगवान सीधे शबरी जी के पास गये । और शबरी जी कौन हैं इस पर आपने विचार किया ? गोस्वामीजी के बारे में यह बात बड़ी प्रसिद्ध है कि वे स्त्रियों तथा शूद्रों के बड़े विरोधी थे । और अक्सर लोग यह चौपाई दुहरा देते हैं कि -
ढोल गवाँर शूद्र पसु नारी ।
सकल ताड़ना के अधिकारी ।।
- और सचमुच इसको पढ़कर तो यही लगता है कि वे स्त्री तथा शुद्र दोनों के विरोधी थे । किन्तु इस प्रसंग को अगर आप ध्यान से पढ़ें तो आपको यह अच्छी तरह पता चल जायेगा कि संयोग से शबरीजी स्त्री और शूद्र दोनों ही है । और शबरी जी से जब भगवान राम का वार्तालाप हुआ तो उन्होंने यही कहा कि महाराज ! मैं स्त्री हूँ और स्त्री में भी छोटी जाति की हूँ । पर भगवान ने उनसे स्पष्ट कह दिया कि इससे मुझको क्या लेना-देना है, क्योंकि मैं तो जाति-पाँति को मानता ही नहीं हूँ । - तो भई ! आप इसको क्यों नहीं पढ़ते, आप कबन्ध बनकर ही क्यों पढ़ना चाहते हैं ? कबन्ध तो अत्यंत द्वेषयुक्त ह्रदय वाला है । शबरी के लिए भगवान के मन में अत्यधिक श्रद्धा है । नारी और शूद्र के रूप में दिखायी देने वाली शबरी को भगवान ने जितना सम्मान दिया उतना सम्मान तो रामायण में ब्राह्मण वर्ण के किसी महात्मा को भी नहीं दिया ।
ढोल गवाँर शूद्र पसु नारी ।
सकल ताड़ना के अधिकारी ।।
- और सचमुच इसको पढ़कर तो यही लगता है कि वे स्त्री तथा शुद्र दोनों के विरोधी थे । किन्तु इस प्रसंग को अगर आप ध्यान से पढ़ें तो आपको यह अच्छी तरह पता चल जायेगा कि संयोग से शबरीजी स्त्री और शूद्र दोनों ही है । और शबरी जी से जब भगवान राम का वार्तालाप हुआ तो उन्होंने यही कहा कि महाराज ! मैं स्त्री हूँ और स्त्री में भी छोटी जाति की हूँ । पर भगवान ने उनसे स्पष्ट कह दिया कि इससे मुझको क्या लेना-देना है, क्योंकि मैं तो जाति-पाँति को मानता ही नहीं हूँ । - तो भई ! आप इसको क्यों नहीं पढ़ते, आप कबन्ध बनकर ही क्यों पढ़ना चाहते हैं ? कबन्ध तो अत्यंत द्वेषयुक्त ह्रदय वाला है । शबरी के लिए भगवान के मन में अत्यधिक श्रद्धा है । नारी और शूद्र के रूप में दिखायी देने वाली शबरी को भगवान ने जितना सम्मान दिया उतना सम्मान तो रामायण में ब्राह्मण वर्ण के किसी महात्मा को भी नहीं दिया ।
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