Thursday, 13 April 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .........

एक माँ जब अपने बालक से व्यवहार करती है तो क्या उसमें नीति नहीं होती है । माँ बालक को कभी डाँटती है, कभी समझाती है । माँ जब बालक को समझाती है तो उसमें साम-नीति है । जब कभी मिठाई का लोभ देती है, तो उसमें दाम-नीति है । कभी छड़ी उठाती है, तो यह दण्ड-नीति है और जब कभी दूसरे बालकों से अलग करने की चेष्टा करती है तब वह भेद-नीति का आश्रय लेती है । पर माँ की विशेषता यह है कि उसकी नीति, प्रीति बालक के हित के लिए है, अपने स्वार्थ के लिए या अपनी सत्ता प्रदर्शन के लिए नहीं है । रामचरितमानस में पग-पग पर भगवान राम ने नीति और प्रीति दोनों को मिलाकर समाज को एक नयी दृष्टि दी ।

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