Friday, 21 April 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

भगवान राम के चरित्र में जब यात्राएँ प्रारंभ हुई तब उनमें ज्ञान, भक्ति और कर्म इन तीनों का सामंजस्य आपको मिलेगा । जब भगवान विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने के लिए उनके आश्रम तक की यात्रा करते हैं, तब यह मानो कर्मपथ था । क्योंकि कर्मपथ का अभिप्राय है कि जो कर्म अन्यायियों तथा राक्षसों को दण्ड देने के लिए, बुराई को मिटाने के लिए, यज्ञ की रक्षा करने के लिए किया जाय, जहाँ पर सत्कर्म का उद्देश्य स्वार्थ न होकर लोक-कल्याण है ।

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