भगवान राम ने जन्म लिया तो चार भाइयों के रूप में लिया । अगर भगवान चाहते तो एक ही माता के गर्भ से भी जन्म ले सकते थे, पर एक ही माता के माध्यम से न लेकर तीन माताओं के माध्यम से जन्म लिया । ये तीन माताएँ कौन हैं ? अगर आप विचार करें तो आपको लगेगा कि वस्तुतः अयोध्या से ही यह त्रिवेणी संगम प्रारंभ हो गया । कौसल्या, सुमित्रा, कैकेयी के आध्यात्मिक स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा गया कि महाराज दशरथ मूर्तिमान वेद हैं । कौसल्या जी ज्ञानमयी हैं, कैकेयी जी क्रियामयी हैं और सुमित्रा जी उपासनामयी हैं । भगवान राम से अब अगर पूछा जाय कि आप ज्ञान के माध्यम से मिलेंगे कि क्रिया के माध्यम से अथवा भक्ति के माध्यम से ? तो भगवान ने तीनों माताओं के माध्यम से जन्म लेकर मानो कहा कि भई ! ज्ञान के माध्यम से भी मैं जन्म लेता हूँ, कर्म के माध्यम से भी मैं ही जन्म लेता हूँ तथा भक्ति के माध्यम से भी मैं ही जन्म लेता हूँ ।
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