जिसको जो मार्ग सुगम हो उसको उसी मार्ग का आश्रय लेना चाहिए । व्यावहारिक जीवन में भी सफलता का मूल मंत्र यही है । बहुधा यह देखा जाता है कि व्यावहारिक जीवन में जो व्यक्ति असफल होते हैं, उन्हें अधिकांश व्यक्ति यह कहते हैं कि यह व्यक्ति तो बड़ा अयोग्य है । पर किसी व्यक्ति का असफल हो जाना उसकी अयोग्यता का सच्चा परिचायक नहीं है । संस्कृत में एक वाक्य में कहा गया कि वस्तुतः कोई व्यक्ति अयोग्य नहीं होता बल्कि होता यह है कि जिस व्यक्ति में जो योग्यता है, उससे भिन्न काम उसे यदि दे दिया जायेगा तो वह व्यक्ति उसमें अयोग्य ही सिध्द होगा । इसका अभिप्राय है कि जिस कार्य में रुचि है, अगर वह कार्य हमें व्यावहारिक जीवन में भी मिले तो हम सफल हो सकते हैं । पर योग्य कहे जाने वाले व्यक्ति को भी यदि ऐसा कार्य दे दिया जाय जिसका उसे अभ्यास नहीं है, तो वह भी अयोग्य सिध्द हो जायेगा । इसलिए संस्कृत में एक वाक्य में कह दिया गया कि संसार में कोई अयोग्य व्यक्ति है ही नहीं, पर उसकी योग्यता को परखकर उससे उपयुक्त काम लेने वाले संसार में दुर्लभ हैं ।
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