आप आदि से अन्त तक रामचरितमानस का अध्ययन करेंगे तो ज्ञात होगा कि भगवान राम का व्यक्तित्व क्या है, भगवान राम का चरित्र क्या है । वैसे वे साक्षात ईश्वर तो हैं ही पर ईश्वर होने के साथ-साथ उन्होंने जो नर चरित्र किया है, वह कोई साधारण नहीं है । अपितु शास्त्रों और पुराणों में जिन सिध्दांतों का प्रतिपादन किया गया है, जो उपदेश दिये गये हैं, उन्हीं का समग्र आचरित रूप ही श्रीराम के रूप में प्रकट होता है । गीता के सन्दर्भ में इसे देखें तो यह कह सकते हैं कि गीता में जिसे सूत्र के रूप में कहा गया है रामायण में उसे क्रियात्मक रूप में प्रत्यक्ष प्रदर्शित किया गया है ।
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