सुबेल पर्वत पर कितना सुन्दर दृश्य है ! भगवान राम के दाहिने कान के पास विभीषण जी बैठे हुए हैं । और लक्ष्मण जी कहाँ बैठे हुए हैं ? इसका स्पष्टीकरण करते हुए तुलसीदास जी ने कहा कि लक्ष्मण जी पीछे की ओर, कुछ दूर पर बैठे हुए हैं । इसमें एक ओर तो भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण हैं और दूसरी ओर रावण के छोटे भाई विभीषण हैं । किन्तु भगवान राम जब दोनों के बैठने के स्थान का चुनाव करने लगे तो लक्ष्मण जी से भगवान ने पूछा - लक्ष्मण ! तुम कहाँ बैठोगे ? मेरे पास या मुझसे दूर ? लक्ष्मण जी ने कहा - महाराज ! आपके पास दूसरों को बैठने के लिए जगह खाली रहे, इसलिए मैं जरा दूर ही बैठूँगा । इस तरह भगवान श्रीराघवेन्द्र मनुष्य से लेकर गीध, पशु-पक्षी और राक्षसों तक को एकाकार कर देते हैं ।
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