Saturday, 8 April 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

भगवान राम की अयोध्या से लेकर लंका तक की यात्रा में यदि क्रम से देखेंगे तो आपको दिखायी देगा कि भगवान श्रीराघवेन्द्र पहले मनुष्य और मनुष्य में सामीप्य की सृष्टि करते हैं । फिर मनुष्य तथा पशु-पक्षियों में जो दूरी विद्यमान थी उसे समाप्त करते हैं । और फिर मनुष्यों तथा राक्षसों में सामीप्य की सृष्टि करते हैं । इस तरह से यह कह सकते हैं कि भगवान श्रीराम ने अपनी सारी यात्राओं के द्वारा सबको मिलाकर एक कर दिया । और मिलाने की इस कला की अन्तिम परिणति रामराज्य के रूप में होती है । क्योंकि रामराज्य तब तक नहीं बन सकता, जब तक सारा समाज भगवान राम के प्रेम-सूत्र में आबद्ध नहीं हो जाता ।

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