Tuesday, 25 April 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

ताड़का के दो बेटे हैं - एक तो सुनहला मृग मारीच है । इसका तात्पर्य है कि जो व्यक्ति आशा करता है, उसको सर्वत्र सुनहला मृग ही दिखायी देता है, परन्तु भगवान श्रीराघवेन्द्र ने इस मारीच को दूर फेंक दिया । इसका तात्पर्य है कि व्यक्ति को सुनहली कल्पनाओं को जीवन से दूर फेंक देना चाहिए । और जहाँ पर आशा होगी वहीं पर दोष का भी जन्म होगा, यही सुबाहु है । पर इस सुबाहु को भी जीतना होगा । इसका अभिप्राय है कि जीवन में निष्काम कर्म का जो आदर्श है वही श्रेयस्कर है । इसलिए भगवान राम ने आशा छोड़ कर, बदले में पाने की कामना छोड़कर, सुनहली कल्पना छोड़ कर, विश्व की सेवा करने का जो कर्मपथ है, उसको अपने चरित्र के माध्यम से पूरा कर लिया ।

No comments:

Post a Comment