भगवान राम ने मार्ग के विषय में जिज्ञासा भी की, तो त्रिवेणी के किनारे रहने वाले एक सन्त से की । त्रिवेणी का अभिप्राय है कि जहाँ पर गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम हुआ है । इसका अभिप्राय है कि यदि किसी से यह प्रश्न किया जाय कि ज्ञान, भक्ति और कर्म में किसकी श्रेष्ठता है ? तो भगवान राम ने अपने चरित्र के द्वारा इसका उत्तर इस प्रकार दिया कि ज्ञान, भक्ति और कर्म इनमें से जिसका भी संस्कार व्यक्ति में प्रबल हो वहाँ से साधना प्रारंभ हो, किन्तु अन्त में संगम जरूर होना चाहिए ।
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