Wednesday, 29 November 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच .......

देवताओं के प्रार्थना से भगवान प्रसन्न होकर कहते हैं कि हम अवतार लेकर रावण का वध करेंगे । तब ब्रह्माजी ने देवताओं से कहा कि भगवान ने तो तुमसे कह दिया कि हम तुम्हारे लिए मनुष्य बनेंगे, पर तुम बताओ कि तुम क्या बनोगे ? देवताओं ने कहा कि महाराज ! क्या हम लोगों को भी कुछ बनना पड़ेगा ? ब्रह्मा ने कहा कि समस्या ईश्वर की नहीं, तुम्हारी है, अतः जब ईश्वर नर बन रहा है, तो तुम कम-से-कम वानर तो बनो, तभी ठीक-ठीक मिलन होगा । ब्रह्माजी बड़ा सूत्रात्मक आदेश देते हुए कहते हैं कि बन्दर बनोगे तो पूरे बन्दर ही न हो जाना । बन्दर दोषयुक्त तो है ही, वह बड़ा कामी और भोगी होता है । ब्रह्माजी ने कहा कि स्वर्ग से नीचे उतरो, भोगों का परित्याग करो, वानर शरीर धारण करो और भगवान के चरणों की भक्ति-सेवा करो । इसका अभिप्राय यह है कि पुण्य का उपयोग भोग में नहीं, भक्ति में करो । इस प्रकार ईश्वर जब नर बने, तब वे विविध देवता बन्दरों के रूप में आते हैं ।

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