Monday, 6 November 2017

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ......

कई बार लोग कह देते हैं कि जगत् के कल्याण के लिए गोस्वामीजी ने भगवान राम के चरित्र का वर्णन किया । पर यह बात मुझे ठीक नहीं लगती । जैसा कि साधारणतया मान लिया जाता है कि किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए कोई एक माध्यम का आश्रय लिया जाता है उसी प्रकार से श्रीराम उनके लिए एक माध्यम नहीं हैं । उन्होंने लोक-कल्याण की बात कहने के उद्देश्य से भगवान राम को माध्यम बनाया, ऐसी बात नहीं है । वे यह मानकर भगवान राम के विषय में नहीं लिखते कि यह समाज के लिए उपादेय होगा । इसे हम इस तरह कह सकते हैं कि उनका लिखना एक बाध्यता है । भगवान राम से उनका एक अटूट नाता है । गोस्वामीजी से लोग पूछते थे कि तुम बता सकते हो कि तुम्हारे भीतर राम की भक्ति कब से आई ! गोस्वामीजी विनय-पत्रिका में कहते हैं कि तुलसी तुम्हारा राम से परिचय नया नहीं है, जन्म-जन्मान्तर से तुम केवल राम के हो । राम के विषय में ही तुम कुछ कह सकते हो, अन्य के विषय में कुछ कह नहीं सकते ।

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