कल से आगे .......
जब ज्ञानी से पूछा गया कि व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या क्या है ? व्यक्ति के पुनर्निर्माण का उपाय क्या है ? तो उन्होंने कहा कि व्यक्ति की बुद्धि में जब तक भ्रम है और जब तक भ्रम का निवारण नहीं होगा, जब तक व्यक्ति में विवेक जाग्रत नहीं होगा, तब तक व्यक्ति भटकता रहेगा, परमानंद की प्राप्ति नहीं कर सकेगा। इसलिए उन्होंने कहा कि अन्तःकरण में सर्वोच्च केन्द्र बुद्धि का है और इसे ही ज्ञानदीपक के रूप में शोधन करके आप अपनी बुद्धि को परिवर्तित करें और उस शुद्ध बुद्धि के द्वारा सत्य का साक्षात्कार करें। हमारे अन्तःकरण में जो ग्रन्थियाँ पड़ गयी हैं, उन ग्रन्थियों से हम इस बुद्धि के द्वारा मुक्त हो जाएँ। इस तरह ज्ञानियों ने बुद्धि को केन्द्र बनाकर विचार किया।
जब ज्ञानी से पूछा गया कि व्यक्ति की सबसे बड़ी समस्या क्या है ? व्यक्ति के पुनर्निर्माण का उपाय क्या है ? तो उन्होंने कहा कि व्यक्ति की बुद्धि में जब तक भ्रम है और जब तक भ्रम का निवारण नहीं होगा, जब तक व्यक्ति में विवेक जाग्रत नहीं होगा, तब तक व्यक्ति भटकता रहेगा, परमानंद की प्राप्ति नहीं कर सकेगा। इसलिए उन्होंने कहा कि अन्तःकरण में सर्वोच्च केन्द्र बुद्धि का है और इसे ही ज्ञानदीपक के रूप में शोधन करके आप अपनी बुद्धि को परिवर्तित करें और उस शुद्ध बुद्धि के द्वारा सत्य का साक्षात्कार करें। हमारे अन्तःकरण में जो ग्रन्थियाँ पड़ गयी हैं, उन ग्रन्थियों से हम इस बुद्धि के द्वारा मुक्त हो जाएँ। इस तरह ज्ञानियों ने बुद्धि को केन्द्र बनाकर विचार किया।
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