Wednesday, 30 September 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्............

अहंकार को केन्द्र बनाकर समाज को स्वस्थ बनाने की पद्धति धर्म की पद्धति है। बुद्धि को केन्द्र बनाकर समाज की स्वथ्यता ज्ञान की पद्धति है। चित्त को केन्द्र बनाकर योग की पद्धति है। ह्रदय और मन को स्वस्थ बनाकर समाज बनाने की जो प्रक्रिया है, यही भक्ति की प्रक्रिया है। इसका सांकेतिक रूप से गोस्वामीजी ने रामचरितमानस में बहुत ही मधुर पद्धति में वर्णन प्रस्तुत किया है। उन्होंने मानस में भगवान राम के विविध चित्र प्रस्तुत किये, जो बड़े मधुर और आकर्षक हैं, लेकिन जब भगवान राम ने उनसे पूछा कि इन सारी पद्धतियों में, सारे रूपों में हमारा कौन सा रूप तुम्हें सबसे अधिक प्रिय है ?
          .......आगे कल.......

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