Friday, 4 September 2015

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच्..............

भगवान श्रीराम के अवतार का क्या प्रयोजन है ? आप कह सकते हैं कि भगवान श्रीराम का उद्देश्य राक्षसों का वध करना है, तो यह भी एक उत्तर है। फिर यह भी कह सकते हैं कि समाज में जो अस्वस्थता आ गयी थी, उसे मिटाने के लिए भगवान राम का अवतार हुआ था। ये दोनों उत्तर सही हैं, क्योंकि भगवान राम के चरित्र के द्वारा दोनों ही कार्य पूरे हुए। श्री भरत की मुख्य भूमिका तो मानस-रोगों को विनष्ट करने की है ही, पर भगवान राम के चरित्र में भी आप यह पक्ष पाते हैं कि जो अस्वस्थ व्यक्ति है, मानसिक दृष्टि से रूग्ण हैं, भगवान राम उनकी अपने चरित्र के द्वारा चिकित्सा करते हैं। हम जो रामायण पढ़ते हैं, सुनते हैं, भगवान के चरित्र का पठन-पाठन करते हैं, इस सबका तात्पर्य यह है कि हमारे जीवन में भी वैसी ही समग्रता आवे, जैसी भगवान राम के जीवन में थी ; हमारा अन्तःकरण भी उसी प्रकार का हो जाय जैसा भगवान श्रीराम का था।

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