यह रावण क्या है ? यह है ब्राह्मणों के शाप से आहत प्रतापभानु के अन्तःकरण की प्रतिक्रिया । प्रतापभानु के चरित्र के बारे में लिखा हुआ है -
दिन प्रति देह बिबिध बिधी दाना ।
सुनइ शास्त्र विधी वेद पुराना ।।
विप्र भवन सुर भवन सुनाए ।
सब तीरथन्ह विचित्र बनाए ।।
इस तरह के पवित्रतम कार्य प्रतापभानु के द्वारा हुआ करते थे । और वही जब रावण बनता है, तो उसके जीवन में एक ही व्रत है -
जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं ।
नगर गाउँ पुर आग लगावहिं ।।
- प्रतापभानु के अन्तःकरण की प्रतिक्रिया ही आज रावण के रूप में प्रकट होती है कि हमने भला बनने की चेष्टा की और बदले में हमें शाप देकर हमारे पूरे परिवार को नष्ट कर दिया गया । तो अब मैं बुराई के द्वारा इसका बदला लूँगा । और इसका परिणाम यह होता है कि इस प्रतिक्रिया के फलस्वरूप रावण सारे समाज पर अत्याचार करता है । तो जहाँ शिवजी का क्रोध समाज के लिए कल्याणकारी है, वहीं रावण के रूप में इस क्रोध का विकृत स्वरूप समाज के लिए अभिशाप बनकर आता है ।
दिन प्रति देह बिबिध बिधी दाना ।
सुनइ शास्त्र विधी वेद पुराना ।।
विप्र भवन सुर भवन सुनाए ।
सब तीरथन्ह विचित्र बनाए ।।
इस तरह के पवित्रतम कार्य प्रतापभानु के द्वारा हुआ करते थे । और वही जब रावण बनता है, तो उसके जीवन में एक ही व्रत है -
जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं ।
नगर गाउँ पुर आग लगावहिं ।।
- प्रतापभानु के अन्तःकरण की प्रतिक्रिया ही आज रावण के रूप में प्रकट होती है कि हमने भला बनने की चेष्टा की और बदले में हमें शाप देकर हमारे पूरे परिवार को नष्ट कर दिया गया । तो अब मैं बुराई के द्वारा इसका बदला लूँगा । और इसका परिणाम यह होता है कि इस प्रतिक्रिया के फलस्वरूप रावण सारे समाज पर अत्याचार करता है । तो जहाँ शिवजी का क्रोध समाज के लिए कल्याणकारी है, वहीं रावण के रूप में इस क्रोध का विकृत स्वरूप समाज के लिए अभिशाप बनकर आता है ।
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