Sunday, 19 June 2016

युग तुलसी श्री रामकिंकर उवाच ........

हनुमानजी द्वारा भेद नीति का प्रयोग क्या था - उन्होंने सबका घर तो जला दिया, पर विभीषण का घर छोड़ दिया । और सचमुच उससे रावण के मन में जबरदस्त भेद पड़ गया । रावण ने सोचा कि जब मैंने इस बन्दर को मृत्युदंड दिया, तो इसी विभीषण ने आकर रोका था । और इसी बन्दर ने सारा नगर जलाया पर इसी का घर छोड़ दिया । लगता है, दोनों मिले हुए हैं । अब मैं इसको सह नहीं सकता । हनुमानजी को अभीष्ट भी यही था कि रावण के मन में विभीषण के प्रति अविश्वास उत्पन्न हो जाए । और तब रावण ने क्या किया ? वह यह भी निर्णय कर सकता था कि विभीषण को कैद में डाल दे । पर उसने ऐसा नहीं किया । रावण ने सोचा, कि विभीषण अगर तुम समझते हो कि तुम्हारा घर नहीं जला, तो भले ही उस बन्दर ने तुझे न जलाया हो पर - "रावण क्रोध अनल निज" मैं अपने क्रोध की अग्नि के द्वारा तुम्हें जलाकर नष्ट कर दूँगा । और इस तरह लात मारकर उसे घर से निकाल देता है ।

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