भगवान राम ने सीधे लंका पर आक्रमण न करके पहले हनुमानजी को वहाँ भेजा था । इसका सांकेतिक तात्पर्य क्या है ? रामचरितमानस में जहाँ पर मानस रोगों का वर्णन आया है, वहाँ मानस रोगों के वर्णन के साथ ही यह भी कहा गया है कि मन के रोगों को नष्ट करने वाला वैद्य चाहिए । और वह वैद्य कौन है ? - सद्गुरु ही वह वैद्य है । हनुमानजी को रावण के पास भेजने का तात्पर्य यह था कि हनुमानजी ही वस्तुतः सद्गुरु हैं । वे शंकर के अवतार हैं । इसलिए वे वैद्यों के वैद्य हैं । भगवान शंकर के लिए रामायण में कहा गया है -
तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना ।
वे त्रिभुवन के गुरु और सबसे बड़े वैद्य हैं । और रावण तो एक कल्प में उनके गण के रूप में उनका शिष्य भी रह चुका है । तो भगवान का तात्पर्य यह है कि रावण जैसा रोगी, जो अपने रोग के द्वारा स्वयं तो दुःख पा ही रहा है, पर अपने से भी अधिक वह सारे समाज को दुःख में डाल रहा है, उसके रोग का निदान हो जाए । भगवान चेष्टा करते हैं कि रावण के वध की आवश्यकता न पड़े ।
तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना ।
वे त्रिभुवन के गुरु और सबसे बड़े वैद्य हैं । और रावण तो एक कल्प में उनके गण के रूप में उनका शिष्य भी रह चुका है । तो भगवान का तात्पर्य यह है कि रावण जैसा रोगी, जो अपने रोग के द्वारा स्वयं तो दुःख पा ही रहा है, पर अपने से भी अधिक वह सारे समाज को दुःख में डाल रहा है, उसके रोग का निदान हो जाए । भगवान चेष्टा करते हैं कि रावण के वध की आवश्यकता न पड़े ।
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