रामचरितमानस में कहा गया है कि किसी के जीवन में अगर केवल काम है, तो वह बात ज्वर से पीड़ित है । अगर किसी के जीवन में केवल लोभ है, तो वह कफ ज्वर से पीड़ित है और किसी के जीवन में क्रोध है तो वह पित्त ज्वर से पीड़ित है । पर यदि किसी के जीवन में ये तीनों हों, तब क्या होगा ? गोस्वामीजी कहते हैं कि अगर तीनों हों तो समझ लेना चाहिए कि बस सन्निपात रोग हो गया है । तो यहाँ रावण के सन्दर्भ में सन्निपात शब्द का ही प्रयोग किया गया है । अंगद जब रावण की सभा में गए, तो रावण बहुत बकबक करने लगा । अंगद उसे बड़े ध्यान से सुन रहे थे । रावण ने पूछा - तुमने मेरी बात को बड़े ध्यान से सुना, कुछ समझ में आया ? अंगद ने कहा - मैं यही देखने तो आया था कि तुम्हें कौन-सा रोग हुआ है ? और अब समझ में आ गया - तुम्हें तो सन्निपात हो गया है । जब हनुमानजी जैसा वैद्य भी आकर तुम्हारी चिकित्सा नहीं कर पाया, तब तो तुम्हारी चिकित्सा होना मुश्किल है ।
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