किसी ने गोस्वामीजी से पूछ दिया - श्रीराम को पा लेने के बाद श्रीभरत का क्या अवदान हो सकता है ? श्रीराम साक्षात ईश्वर हैं और ईश्वर प्राप्ति सबसे महान उपलब्धि है । भगवान श्रीराम की अयोध्या से लंका तक की उस लम्बी यात्रा में जिन लोगों ने श्रीराम का दर्शन किया उन्हें और क्या पाना शेष रह गया था जिसकी पूर्ति श्रीभरत करते हैं ? तो गोस्वामीजी कहते हैं - श्रीराम के दर्शन से चाहे जो भी मिला हो लेकिन एक वस्तु ऐसी थी जो श्रीभरत के दर्शन से प्राप्त हुई । और वह क्या थी ? गोस्वामीजी कहते हैं - रास्ते में जो असंख्य जड़-चेतन जीव थे उनमें से जिनको भगवान श्रीराम ने देखा, वे सब परम पद के अधिकारी हो गये । ईश्वर का दर्शन मुक्ति प्रदान करता है । लेकिन गोस्वामीजी यहाँ पर एक सूक्ष्म संकेत सूत्र देते हैं । वे कहते हैं कि मुक्ति और मुक्ति का सुख इसमें एक सुक्ष्म अंतर है । क्या ? मुक्ति तो पा लेना एक बार सरल है पर मुक्ति के सुख की जो अनुभूति है, उसे पाना सरल नहीं है । वे कहते हैंं कि भगवान तो मुक्ति देकर चले गए पर मुक्ति का सुख श्रीभरत के दर्शन के बिना नहीं मिलेगा ।
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